हसदेव टाइम्स/जांजगीर/पटवारियों का पीवी ऐप से काम करने का बहिष्कार, धान खरीदी से पहले सत्यापन पूरा करने की चुनौती

13 अक्टूबर से पटवारियों का काम बंद, प्रमाण पत्र से लेकर गिरदावरी तक कामकाज प्रभावित,
राजस्व पटवारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल से जिले में राजस्व संबंधी कामकाज प्रभावित होने लगा है। मांगों और समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर पटवारी 13 अक्टूबर से काम बंद कर हड़ताल पर हैं। इसका असर जिले की सभी तहसीलों में देखने को मिल रहा है। विद्यार्थियों के आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने से लेकर किसानों के सीमांकन, बंटवारा, फौती और समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए जरूरी दस्तावेजों में सुधार जैसे काम अटक गए हैं। वहीं, आगामी धान खरीदी सीजन को लेकर भी किसानों की चिंता बढ़ने लगी है।
कर्मचारी भवन में भजन-कीर्तन कर जताया विरोध
शारदीय नवरात्र के दौरान पटवारियों ने केरा रोड स्थित कर्मचारी भवन में माता रानी के भजन-कीर्तन का आयोजन किया। धार्मिक कार्यक्रम के साथ पटवारियों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध भी दर्ज कराया। उन्होंने पीवी यानी फिजिकल वेरिफिकेशन ऐप के माध्यम से काम करने का बहिष्कार किया और पटवारियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का विरोध करते हुए नारेबाजी की।
पटवारी संघ का कहना है कि उनकी मांगों और समस्याओं के समाधान को लेकर अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार मांगों को पूरा नहीं करती और समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।
पीवी ऐप से गिरदावरी में आ रही परेशानी
पटवारियों के विरोध के बीच पीवी ऐप से फसल सत्यापन का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है। पिछले धान खरीदी सीजन में डिजिटल सत्यापन नहीं हो पाने के कारण कई किसानों को धान बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। पुराने नक्शों के आधार पर खसरों की पहचान करने में परेशानी आने से फसल का भौतिक सत्यापन प्रभावित हुआ था।
राजस्व रिकॉर्ड में खेतों के वास्तविक विभाजन का विवरण दर्ज नहीं होने के कारण भी समस्या सामने आ रही है। कई जगह खेतों का मौके पर बंटवारा हो चुका है, लेकिन नक्शे अपडेट नहीं होने से संबंधित खसरों की सही पहचान करना मुश्किल हो रहा है। इससे गिरदावरी और फसल सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।
धान खरीदी से पहले गिरदावरी अधूरी, 30 प्रतिशत खसरों का सत्यापन बाकी
धान खरीदी सीजन नजदीक आने के साथ गिरदावरी का काम पूरा करना भी जरूरी है। खेतों में धान की फसल तैयार हो रही है और नवंबर से कटाई शुरू होने की संभावना है। गिरदावरी में दर्ज फसल और रकबे के आधार पर किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
जानकारी के अनुसार, जिले में करीब 30 प्रतिशत खसरों की गिरदावरी अभी बाकी है। अक्टूबर तक गिरदावरी पूरी करने की समय-सीमा निर्धारित है। ऐसे में पटवारियों की हड़ताल लंबी खिंचने पर सत्यापन कार्य समय पर पूरा करने की चुनौती बढ़ सकती है।
किसानों और विद्यार्थियों की बढ़ सकती है परेशानी
हड़ताल के कारण आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र सहित विभिन्न राजस्व सेवाओं का काम प्रभावित होने से विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं, किसानों के सीमांकन, बंटवारा, फौती और धान खरीदी से जुड़े दस्तावेजों में सुधार के काम लंबित होने से उनकी चिंता बढ़ गई है।
यदि समय रहते गिरदावरी और अन्य जरूरी राजस्व कार्य पूरे नहीं हुए, तो धान खरीदी के दौरान किसानों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अब सबकी नजर पटवारी संघ की मांगों और सरकार के रुख पर टिकी है।






