जांजगीर चाम्पा : स्कूल में शराब, टेबल के नीचे शिक्षक और बच्चों के सामने हरकतें; 9 महीने में 18 निलंबन, 5 जेल

हसदेव टाइम्स/जांजगीर-चांपा/जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जो विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। कहीं शिक्षक के शराब के नशे में स्कूल पहुंचने का वीडियो वायरल हो रहा है, तो कहीं शिक्षक के बच्चों के सामने अशोभनीय व्यवहार के आरोप लग रहे हैं। पिछले नौ महीनों में ऐसी 28 शिकायतें सामने आने का दावा है। विभागीय कार्रवाई के आंकड़ों के मुताबिक, 18 शिक्षकों को निलंबित किया गया, 5 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जबकि 3 की वेतन वृद्धि रोकी गई और 2 मामलों में विभागीय जांच जारी है।

 

ताजा मामला पामगढ़ ब्लॉक के भुईगांव स्थित शासकीय प्राथमिक शाला भाठापारा का है। यहां प्रधान पाठक योगेश्वर सिंह कंवर का कथित तौर पर शराब के नशे में स्कूल पहुंचने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में वे ठीक से खड़े नहीं हो पा रहे हैं और पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बहस करते दिखाई दे रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्कूलों में शिक्षकों की निगरानी के लिए पूरा तंत्र मौजूद है, तो आखिर ऐसी घटनाएं बार-बार सामने क्यों आ रही हैं?

छह दिन में दूसरा मामला, आखिर निगरानी कहां है?

जिले में महज छह दिनों के भीतर शिक्षक के नशे की हालत में स्कूल पहुंचने का यह दूसरा मामला बताया जा रहा है। इससे पहले 19 सितंबर 2026 को बलौदा ब्लॉक के परसदा स्थित नवीन प्राथमिक शाला में एक शिक्षक कथित रूप से शराब के नशे में स्कूल पहुंचा था। शिक्षक को टेबल के नीचे लेटा देखकर बच्चे सहम गए थे।

लगातार सामने आ रहे मामलों ने बीईओ, बीआरसी, एपीसी और संकुल समन्वयकों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन अधिकारियों और कर्मचारियों पर स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति तथा शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी की जिम्मेदारी है।

वीडियो वायरल हुआ, तब जागा विभाग

जिले में सामने आए कई मामलों में एक पैटर्न नजर आता है—पहले घटना सामने आती है, फिर उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होता है और उसके बाद विभागीय कार्रवाई शुरू होती है।

20 अगस्त 2026 को बलौदा के नवापारा (खिसोरा) में प्रधान पाठक के बालिका शौचालय के पीछे शराब पीते पकड़े जाने का मामला सामने आया था। जांच के बाद उन्हें निलंबित किया गया।

पामगढ़ के डोंगाकोहरौद में भी प्रधान पाठक पर बच्चों के सामने अशोभनीय हरकत करने का आरोप लगा था। मामला बढ़ने पर पुलिस मौके पर पहुंची और प्रधान पाठक को गिरफ्तार किया गया।

पिछले साल भी नहीं थमे थे मामले

यह समस्या नई नहीं है। सितंबर 2025 में बलौदा विकासखंड के लेवई स्थित प्राथमिक शाला में एक शिक्षिका के कथित रूप से शराब के नशे में स्कूल पहुंचने और टेबल पर पैर फैलाकर सोने का वीडियो सामने आया था। इसके बाद निलंबन की कार्रवाई हुई।

अगस्त 2025 में अकलतरा के अमोरा गांव में शिक्षक लोकपाल बर्मन पर शराब पीकर स्कूल आने और पढ़ाई प्रभावित करने के आरोप लगे थे।

वहीं सितंबर 2025 में नवागढ़ ब्लॉक के उदयभाठा मिडिल स्कूल का एक शिक्षक कथित तौर पर शराब के नशे में बीईओ कार्यालय पहुंच गया था। जांच रिपोर्ट के बाद उसे निलंबित किया गया।

6 मार्च 2025 को शासकीय प्राथमिक शाला रायपुरा के प्रधान पाठक सथउ राम यादव के शराब के नशे में स्कूल में पाए जाने का मामला सामने आया था। बताया गया कि उनके खिलाफ पहले भी इसी तरह की कार्रवाई हो चुकी थी।

28 शिकायतें… लेकिन बर्खास्तगी एक भी नहीं

पिछले नौ महीनों में अनुशासनहीनता, शराबखोरी और अन्य गंभीर मामलों से जुड़ी 28 शिकायतों पर कार्रवाई की गई। इनमें 18 शिक्षकों का निलंबन हुआ और 5 को गंभीर मामलों में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

इसके अलावा 3 शिक्षकों की वेतन वृद्धि रोकी गई, जबकि 2 मामलों में विभागीय जांच जारी है।

लेकिन इन आंकड़ों के बीच एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है—इतनी कार्रवाई के बावजूद अब तक किसी शिक्षक की बर्खास्तगी क्यों नहीं हुई?

क्या केवल निलंबन से ऐसी घटनाओं पर रोक लग रही है या फिर कार्रवाई के बाद कुछ समय बीतते ही मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है?

मंत्री के एफआईआर निर्देश भी सवालों के घेरे में

स्कूलों में शिक्षकों के नशे में पहुंचने के लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने दोषी शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे।

इसके बावजूद इस वर्ष जिले में नशे की हालत में पाए गए कई शिक्षकों के मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं होने की बात सामने आई है।

यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ शिक्षकों के आचरण का नहीं, बल्कि शिकायत से लेकर जांच और कार्रवाई तक पूरी व्यवस्था की जवाबदेही का है।

बच्चों की पढ़ाई और स्कूल की गरिमा का क्या?

सरकारी स्कूलों में शिक्षक सिर्फ पढ़ाने की जिम्मेदारी नहीं निभाते, बल्कि बच्चों के लिए अनुशासन और व्यवहार का उदाहरण भी होते हैं। ऐसे में यदि स्कूल समय में शिक्षक नशे की हालत में पाए जाने के आरोप लगते हैं या बच्चों के सामने अशोभनीय घटनाएं सामने आती हैं, तो इसका सीधा असर स्कूल के माहौल और बच्चों पर पड़ना स्वाभाविक है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि भुईगांव के ताजा मामले में विभाग सिर्फ निलंबन तक कार्रवाई सीमित रखता है या पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करते हुए निगरानी तंत्र की भी जवाबदेही तय की जाती है।

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