हसदेव टाइम्स/जांजगीर/भीमा तालाब बचाने एकजुट हुए नागरिक, प्रशासन को 7 दिन का अल्टीमेटम

जांजगीर-नैला/शहर की ऐतिहासिक धरोहर और पहचान माने जाने वाले भीमा तालाब की बदहाली को लेकर नागरिकों का आक्रोश एक बार फिर सामने आया है। 14 अक्टूबर को ‘भीमा बचाओ समिति’ के नेतृत्व में शहरवासियों ने पैदल रैली निकालकर प्रदर्शन किया और कलेक्टोरेट पहुंचकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि निर्धारित समय में तालाब के संरक्षण, सफाई और मरम्मत के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो नगरपालिका का घेराव किया जाएगा।
6.5 करोड़ के सौंदर्यीकरण के बाद भी बदहाली
भीमा तालाब के सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों पर करीब 6.5 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। 5 जनवरी 2022 को इसका लोकार्पण हुआ था। परियोजना के तहत परिसर में दो प्रवेश द्वार, चार व्यू प्वाइंट सहित कई विकास कार्य कराए गए थे। लेकिन रखरखाव के अभाव में अब परिसर की स्थिति खराब हो चुकी है। ओपन जिम के उपकरण और झूले टूट रहे हैं, जबकि परिक्रमा पथ भी जर्जर हो गया है।
नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद नियमित देखरेख की व्यवस्था नहीं होने से तालाब की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। नालियों का गंदा पानी, सीवेज और आसपास की दुकानों से निकलने वाला कचरा तालाब में पहुंचने से जल प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है।
शहर के दूसरे तालाब भी बदहाली के शिकार
शहर में भीमा तालाब के अलावा करीब दर्जनभर तालाबों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। वार्ड-5 स्थित जूना तालाब का जलस्तर ठीक होने के बावजूद पानी मटमैला और बदबूदार हो गया है। वार्ड-16 और वार्ड-14 के तालाबों में कचरा फेंके जाने से वे डंपिंग यार्ड में तब्दील होते जा रहे हैं। वार्ड-15 के तालाब में जलकुंभी और घास-फूस फैल गई है। वहीं, नैला-सिवनी रेलवे फाटक के पास स्थित तालाब के बंधे पर गंदगी और झाड़ियां जमा हैं।
सितंबर में भी जताई थी नाराजगी
भीमा तालाब शहर का प्रमुख सार्वजनिक स्थल है, जहां सुबह बड़ी संख्या में लोग मॉर्निंग वॉक के लिए पहुंचते हैं। तालाब की बदहाल स्थिति और परिसर में फैली अव्यवस्थाओं को लेकर 9 सितंबर को भी नागरिकों ने विरोध जताया था। उस दौरान शहरवासियों ने नगरपालिका कार्यालय पहुंचकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई थी। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने से लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
समिति ने रखीं ये प्रमुख मांगें
भीमा बचाओ समिति ने प्रशासन के सामने तालाब के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए कई मांगें रखी हैं। इनमें तालाब में पहुंच रहे नालियों और मल-जल को रोककर उचित दिशा में डायवर्ट करना, पानी की वैज्ञानिक जांच कराकर शुद्धिकरण के उपाय करना और नियमित सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है।
इसके अलावा वर्ष 2017-18 में स्वीकृत सौंदर्यीकरण कार्यों तथा पिछले दो वर्षों से रखरखाव की स्थिति की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है। समिति ने क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत, लाइटिंग व्यवस्था में सुधार, तालाब की मूल सीमाओं का सत्यापन और अतिक्रमण हटाने की भी मांग की है। तालाब के पुनर्जीवन और तात्कालिक मरम्मत के लिए जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद से एक करोड़ रुपए स्वीकृत करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
स्थायी योजना बनाने की मांग
नागरिकों का कहना है कि तालाब केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान भी हैं। ऐसे में इनके संरक्षण के लिए नियमित सफाई, जल गुणवत्ता की निगरानी और दीर्घकालिक रखरखाव नीति जरूरी है। अब शहरवासियों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। समिति ने स्पष्ट किया है कि सात दिन के भीतर ठोस पहल नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।






